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آتش بجانم افکند شوق لقاى دلدار
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از دست رفت صبرم اى ناقه پاى بردار
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اى ساربان خدا را پیوسته متصل ساز
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ایوار را بشبگیر شبگیر را بایوار
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در کیش عشقبازان راحت روا نباشد
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اى دیده اشک میریز اى سینه باش افکار
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هر سنگ و خار این راه سنجابدان و قاقم
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راه زیارتست این، نه راه گشت «*» بازار
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باز ایران محرم شرطست آنکه باشد
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غسل زیارت ما از اشک چشم خونبار
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ما عاشقان مستیم سر را ز پا ندانیم
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«2» این نکتهها بگیرید بر مردمان هشیار
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در راه عشق اگر سر برجاى پا نهادیم
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بر ما ما مگیر نکته ما را ز دست مگذار
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در فال ما نیاید جز عاشقى و مستى
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در کار ما بهائى کرد استخاره صد بار
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کلیات اشعار و آثار فارسى شیخ بهائى، متن، ص: 71